उच्च शिक्षा में संगीत और नृत्य अनुसंधान की वर्तमान प्रवृत्तियाँ
DOI:
https://doi.org/10.64751/h7nfvr91Keywords:
कलात्मक अनुसंधान, अभ्यास-आधारित अनुसंधान, उच्च शिक्षा, संगीत अनुसंधान, नृत्य अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, समानता-विविधता-समावेशन, देहाधारित संज्ञानAbstract
उच्च शिक्षा में संगीत और नृत्य अनुसंधान पारंपरिक संगीतशास्त्र और नृत्य-रचना अध्ययन की सीमाओं से आगे बढ़कर अंतर्विषयी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और सामाजिक रूप से संलग्न विद्वत्ता तक विस्तृत हो गया है। समकालीन अनुसंधान में अभ्यास-आधारित पद्धतियों, देहाधारित संज्ञान, डिजिटल उपकरणों और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोणों का समावेश बढ़ रहा है, साथ ही समानता, उपनिवेशवाद-उन्मूलन, सुलभता और कल्याण जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यह शोध-पत्र संगीत और नृत्य कार्यक्रमों में वर्तमान अनुसंधान एजेंडों को आकार देने वाली प्रमुख प्रवृत्तियों की समीक्षा करता है, जिनमें अभ्यास रूप में अनुसंधान, कलात्मक अनुसंधान पद्धतियाँ, स्क्रीन-माध्यमित प्रदर्शन और डिजिटल अभिलेखीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायित सृजन और विश्लेषण, तंत्रिका-विज्ञान तथा स्वास्थ्य विज्ञान के साथ अंतर्विषयी सहयोग, स्थिरता और सांस्कृतिक नीति, तथा समावेशी शिक्षण-पद्धतियाँ शामिल हैं। यह मानव प्रतिभागियों पर आधारित अनुसंधान, सहयोगात्मक सृजन में लेखकीय अधिकार, डिजिटल प्रदर्शन में आँकड़ा स्वामित्व और सांस्कृतिक अधिग्रहण जैसे उभरते नैतिक और पद्धतिगत प्रश्नों को भी रेखांकित करता है। अंततः यह समीक्षा उच्च शिक्षा में आधारभूत संरचना सहयोग, अंतर्विषयी प्रशिक्षण, नैतिक ढाँचों और सामुदायिक साझेदारी के माध्यम से अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए सुझाव प्रस्तुत करती है।
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